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what is time, The concept of time travel समय क्या है और हम कैसे समय यात्रा कर सकते हैं

what is time ( समय क्या है ? )

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What is time, समय लोगों के लिए एक बहुत ही दिलचस्प विषय है, इसे जो जितनी गहराई से समझना चाहता है उतना ही वह इसमें उलझता हुआ अपने आपको महसूस करता है, कोई कहता है,समय ही सब कुछ है, तो कोई कहता है, समय कुछ नहीं बस इंसान का भ्रम मात्र है तो सवाल उठता है what is time

समय घटनाओं के बीच का अंतराल मात्र है, यानी दो लगातार घटनाओं के बीच का अंतराल या एक गतिशील बिंदु के दुसरे बिंदु तक पहुँचने के बीच के अंतराल को ही समय कहते हैं l दरअसल समय वास्तविक नहीं होते हुए आभासी है, और हमें इसका केवल भ्रम होता है l

क्या समय चौथा आयाम है

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What is time अगर हम अपनी इस दुनिया की बात करें तो हम ये कह सकते हैं कि हम त्रिआयामि दुनिया में रह रहे हैं जहाँ हम किसी भी वस्तु को लम्बाई, चौड़ाई और ऊंचाई या गहराई के रूप में अनुभव कर पाते हैं, इसे ही हम आयाम बोलते हैं, आयाम से मतलब आकार से है कि हम किसी भी वस्तु को किस तरह से देखते और महसूस करते हैं, लेकिन आइंस्टीन ने इसमें समय को और जोड़ दिया जिसका मतलब ये हुआ कि उन्होंने समय को चौथे आयाम का नाम दिया l

क्या समय भ्रम है

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ये सवाल एक बहुत मुश्किल सवाल है What is time या ऐसे कह लीजिये कि इस सवाल का जवाब बहुत मुश्किल है कि क्या समय सिर्फ एक भ्रम मात्र है, या ये वास्तविक है तो आइये थोड़ी चर्चा करते हैं इसपर –

दरअसल समय न तो कोई कण है न कोई वस्तु जिसे उठाकर दिखा दिया जाए कि देखो समय यह है तो अब सवाल उठना लाजिमी है ,तो क्या समय वास्तविक न होकर सिर्फ हमारे दिमाग का भ्रम है l आइये जानते हैं समय को लेकर क्या भ्रम हमें महसूस होते हैं l

समय सापेक्ष है या निरपेक्ष

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वास्तविकता की अगर बात की जाए तो समय और गति सापेक्ष हैं इसीलिए हमें किसी भी पिंड, वस्तु या व्यक्ति के सापेक्ष किसी दुसरे पिंड, वस्तु या व्यक्ति की गति या समय के मान भिन्न- भिन्न मिलते हैं What is time

अब यहां ध्यान दीजिये, परिणाम हमें भले ही भिन्न- भिन्न मिल रहे हैं लेकिन निष्कर्ष हमेशा एक सामान ही रहता है अब ये कैसे संभव होता है की परिणाम अलग- अलग और निष्कर्ष एक, तो इसके कारण जानते हैं l

पहला कारण –

ब्रह्माण्ड का गतिशील होना क्योंकि ब्रह्माण्ड में हर चीज गतिशील है और यहाँ निरपेक्षीय धरातल का आभाव है l

दूसरा कारण –

ब्रह्माण्ड में विरामावस्था का पूरी तरह से आभाव यानी ब्रह्माण्ड में कोई भी स्थान ऐसा नहीं है जहाँ पल भर के लिए भी विराम की अवस्था हो l

तीसरा कारण –

पृथ्वी पर मनुष्य को जो विरमावस्था का अनुभव होता है वह छदम है उसका कारण ये है कि मनुष्य का आकार पृथ्वी की तुलना में नगण्य है और पृथ्वी का गुरत्वाकर्षण बल मनुष्य को बांधे रखता है जिससे मनुष्य, वातावरण और पृथ्वी के साथ एक समान गति से त्वरित हो रहा है l

यही तीन कारण हमें समय के निरपेक्ष होने का भ्रम उत्पन्न करते हैं मान लीजिए आप सड़क पर खड़े होकर आने ऑफिस जाने के लिए बस का इंतज़ार कर रहे हैं तो हम कह सकते हैं हम विरामावस्था में हैं और हमारे सामने जो भी वाहन गुज़र रहे हैं वह गतिशील अवस्था में हैं जबकि असल में हम कभी भी विरामावस्था में नहीं हैं क्योंकि हम हमेशा पृथ्वी के साथ ही उसी की गति से गतिशील हैं यहाँ हम गति को मापन विरामावस्था के सापेक्ष करते हैं इसका मतलब यह है कि पृथ्वी पर ही स्थान परिवर्तन को हम गति कह रहे हैं l

सबसे बड़ा भ्रम ‘ समय सतत है’

ये भी एक भ्रम है कि समय सतत ( निरन्तर ) है समय को माना जाता है कि समय नदी के प्रवाह की तरह है जो निरंतर एक दिशा में आगे की ओर बहता रहता है l

समय की परिभाषा के अनुसार समय की पहचान परिवर्तन, और परिवर्तन की माप, के आधार पर ज्ञात की जाती है अगर परिवर्तन नगण्य है तो हमे उसका आभास नहीं हो पायेगा और हम उसकी माप ज्ञात नहीं कर सकते l

दरअसल दो परिवर्तनों के बीच अंतराल कम से कम होने पर हम उन परिवर्तनों में भेद नहीं कर पाते हैं और तब हम समय को सतत मानने लगते हैं लेकिन हम समय की इकाई के रूप में मानक उसे ही मानते हैं जिसमे परिवर्तन सतत होता है l

भ्रम, समय अनंत है

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समय की उत्पत्ति ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के साथ ही हुआ है क्योंकि बिग बेंग से पहले समय का कोई अर्थ ही नहीं था इसलिए समय अनंत कैसे हो सकता है अब सवाल ये है कि हमें कैसे कह सकते हैं समय अनंत होने का मात्र भ्रम होता है l

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इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि यदि हम ये माने कि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति हुई है तो ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से पहले का समय अनंत हुआ और अगर ब्रह्माण्ड आदि और अनंत है तो समय भी अनंत होगा तो आपने देखा कि दोनों ही स्तिथि में समय अनंत हो रहा है अर्थात इस बात का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता बस इसीलिए हमें समय के अनंत होने का भ्रम होता है l

समय यात्रा एक भ्रम मात्र

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समय में आगे और पीछे का भ्रम ही हमें समय में यात्रा करने के लिए भ्रम पैदा करता है समय का सम्बन्ध हमें दूरी अर्थात अंतरिक्ष से प्रतीत होता है जबकि वास्तविकता में समय का सम्बन्ध पदार्थ से होता है l

सच तो यह है कि समय यात्रा का कोई भी वास्तविक अर्थ ही नहीं निकलता है इसलिए समय यात्रा सिर्फ हमारा भ्रम मात्र है क्योंकि हम यात्रा वहां की ही कर सकते हैं जिसका अपना कोई अस्तित्व हो हम कह सकते हैं कि हम अमेरिका की यात्रा कर रहे हैं अर्थात कुछ समय बाद हम अमेरिका पहुँच जाएंगे

अमेरिका का अपना कोई वजूद है उसका अपना अस्तित्व है लेकिन जब हम समय की यात्रा की बात करते हैं तो इसका मतलब हम समय के भूतकाल और भविष्य काल में यात्रा करने की बात कर रहे होते हैं

जबकि भूतकाल और भविष्य काल का अपना कोई अस्तित्व नहीं है तो हम कैसे और किस दिशा और दूरी के लिए यात्रा करेंगे इसलिए समय यात्रा संभव नहीं हो सकती l

क्या है समय यात्रा

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अभी तक हमने समय यात्रा के बारे में साइंस फिक्शन फिल्मों में ही देखा है जिसमे टाइम मशीन के द्वारा नायक या नायिका भूतकाल या भविष्य काल में पहुँच जाते हैं समय यात्रा का मतलब है समय में यात्रा करना यानी हमारी स्तिथि समय में वर्तमान काल में है लेकिन हम यात्रा करके समय में आगे या पीछे मतलब भूतकाल या भविष्य काल में जा सकें तो आइये देखते हैं क्या ये संभव है और कैसे संभव हो सकता है l

समय यात्रा का विचार कब आया

समय यात्रा का विचार सबसे पहले एच जी वेल्स के उपन्यास ‘ द टाइम मशीन ‘ के द्वारा लोगों में पहुंचा जो 1895 में प्रकाशित हुआ था लेकिन तब ये सिर्फ एक कोरी कल्पना ही थी लेकिन महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने जब दुनिया के बारे में सोच बदलने वाली थ्योरी ‘सापेक्षता का सिद्धांत ‘ यानी ‘थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी’ दुनिया के सामने रखी जिसमे उन्होंने पहली बार ये समझाया कि समय हर जगह एक समान व्यतीत नहीं होता है क्योंकि उससे पहले ये माना जाता था की समय पूरे ब्रह्माण्ड में एक सामान गुज़रता है l

आंइस्टीन के अनुसार दो घटनाओं के बीच का समय इस बात पर निर्भर करता है कि घटना को देखने वाले की गति क्या है और उसकी अपनी स्तिथि क्या है l

गति बढ़ने पर समय धीमा होता जाता है

इस ब्ब्रह्मण्ड में प्रकाश की गति सबसे ज्यादा तेज़ है और पूरे ब्रह्माण्ड में प्रकाश से तेज़ कुछ भी नहीं चल सकता है हम जानते हैं कि प्रकाश एक सेकेंड में ३ लाख किमी के लगभग यात्रा करता है तो यदि कोई वस्तु इस गति से यात्रा करने लगे तो उसका द्रव्यमान अनंत और लम्बाई शून्य हो जायेगी जो भौतिक नियमों के विपरीत है इसलिए प्रकाश से तेज़ कुछ भी ब्रह्माण्ड में नहीं चल सकता है और प्रकाश की चाल पर समय ठहर जाता है या था हुआ प्रतीत होगा l तो हमने देखा हम जैसे- जैसे गति बढ़ाते जाते हैं समय धीमा होता जाता है l

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समय यात्रा में भूत, भविष्य और वर्तमान कुछ नहीं होता

सब कुछ सुनने में कितना अजीब सा लगता है कल्पना कीजिये जहाँ न वर्तमान है न भूतकाल है और न ही भविष्यकाल आप जहाँ मर्ज़ी आये जब मर्ज़ी आये उस हिस्से यानी समय में उस फ्रेम में मौजूद हों, यही तो है समय यात्रा l

दरअसल हम समय को गतिमान मानकर चलते हैं कि समय आगे की और गति कर रहा है पीछे जो छत्ता जा रहा है वह भूत काल है और आगे भविष्य में जा रहा है जबकि वर्तमान में यात्रा कर रहा है l

दरअसल हम समय को गतिमान मानकर चलते हैं कि समय आगे की और गति कर रहा है पीछे जो पीछे छूटता जा रहा है वह भूत काल है और आगे भविष्य में जा रहा है जबकि वर्तमान में यात्रा कर रहा है l

लेकिन रिलेटिविटी के सिद्धांत के अनुसार ब्रह्माण्ड में भूतकाल, भविष्य काल और वर्तमान काल कुछ नहीं है सब कुछ जो घट रहा है वह एक साथ घट रहा है समय के जिस फ्रेम में हम हैं बस वही हम देख पाते हैं l

दरअसल समय को आप सीडी के उदाहरण से समझने की कोशिश करें तो जिस तरह सीडी में पूरी फिल्म है और आप जब चाहे उसे रिवाइंड या फॉरवर्ड करके कही से भी कोई भी सीन देख सकते हैं यानी बस आपको रिमोट से उस फ्रेम पर पहुंचना है आइंस्टीन के अनुसार समय भी ऐसा ही फ्रेम है जिसमे आप कही भी आ जा सकते हैं लेकिन समय स्वतंत्र न होकर स्पेस से बंधा हुआ है l

क्या हम समय के मनचाहे फ्रेम में जा सकते हैं

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अब हमारे मन में यह सवाल ज़रूर आएगा कि हम सीडी की तरह समय को भी रिवाइंड और फॉरवर्ड करके हम अपने मनचाहे फ्रेम में पहुँच सकते हैं तो इस सवाल के लिए हमे स्पेस टाइम को समझना पड़ेगा क्योकि समय स्वतंत्र नहीं है वह स्पेस के साथ बंधा हुआ है जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं l

ब्रह्माण्ड में टाइम और स्पेस दोनों अलग – अलग हैं लेकिन दोनों ट्रेन के दो डिब्बों की तरह एक साथ सफर करते हैं और यहाँ तक कि अगर समय खींचता है तो स्पेस अपने आपको सिकोड़ लेता है जिससे इसकी भरपाई हो जाए l

इस को आप ऐसे समझ सकते हैं सूरज से धरती पर प्रकाश को सफर करने में लगभग 8 मिनट का समय लगता है हम प्रकाश की गति से तो नहीं चल सकते मान लीजिये आप प्रकाश की गति के 99.9 प्रतिशत गति से यात्रा करें तो हम केवल 22 सेकिंड में ही यात्रा पूरी कर लेंगे और इसका कारण होगा स्पेस का तेज़ गति के कारण सिकुड़ जाना इसलिए हमें चार करोड़ तीस लाख मील की दूरी की जगह सिर्फ चालीस लाख मील दूरी ही तय करनी पड़ी l

लेकिन यहां हमें ये ध्यान देना होगा कि पृथ्वी पर इंसान के लिए ये समय 22 सेकेण्ड न होकर वही लगभग तीन मिनट ही होगा और दूरी भी वही रहेगी क्योंकि वह तेज़ गति में नहीं है वह पृथ्वी के साथ ही गति कर रहा है तो वह दुसरे फ्रेम से हमें देख रहा है l

समय यात्रा का हल वार्म होल

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दरअसल स्पेस टाइम एक फैली हुई चादर की तरह न होकर मुड़े हुए हैं यानी उनमे वक्रता है जैसे किसी लोहे की चादर को आप मोड़ दें तो चिमटे की तरह उसकी सतह एक के ऊपर एक समानांतर हो जाएंगी, अब अगर हम उसकी ऊपरी सतह पर कोई बिंदु लें और निचली सतह पर भी तो दिनों बिंदुओं के बीच की दूरी बहुत कम हो जायेगी और वह सिर्फ उतनी होगी जो दोनों के बीच खाली स्थान है अगर हम दोनों बिंदुओं को छेड़ करके मिलाना चाहें, तो उनके बीच खाली स्थान एक सुरंग की तरह होगा जो हमें एक बिंदु से दुसरे बिंदु तक ले जा रहा है यही वार्म होल है l

इसके द्वारा स्पेस में शार्ट कट से यात्रा की जा सकती है लेकिन ये सिर्फ आज तो सैद्धांतिक ही है, प्रेक्टिकली इसका उपयोग संभव नहीं है l

तो कुल मिलकर यही निष्कर्ष निकलता है कि आज की विज्ञानं हमें सैद्धांतिक रूप से समय यात्रा करने की इज़ाज़त देती है, लेकिन प्रायोगिक स्तर पर अभी तो ये संभव नहीं है इसलिए हम तो यही कहेंगे, कि यदि आप समय यात्रा के लिए बहुत उत्सुक हैं तो साइंस फिक्शन मूवीज देखकर ही काम चलाइये, क्योकि असलियत में तो समय यात्रा बहुत दूर की कौड़ी है l

दोस्तों, आपको What is time पोस्ट कैसी लगी ज़रूर बताएं और हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करना न भूलें। धन्यवाद,

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