Black hole – एक अनसुलझी पहेली

Black hole क्या है ? Black hole कैसे बनते हैं ? Black hole कितने प्रकार के होते हैं ? अगर Black hole में गिर जाएँ तो क्या होगा ? हमारे सबसे पास Black hole कहाँ है ? Black hole को कैसे खोजा जाता है ? पृथ्वी कब Black hole बन सकती है ?

ब्लैक होल के बारे में हम आज काफी कुछ जान चुके हैं लेकिन जो अभी हम इनके बारे में नहीं जान पाए हैं उसके सामने ज्ञात जानकारी न के बराबर ही है। ब्लॉक होल आज भी हमारे लिए कोतुहल का विषय बना हुआ है। यह ऐसे ब्रह्माण्ड में विचरते हुए दानव हैं जो अपने रास्ते में आती हुई हर चीज़ को खा जाते हैं, यहाँ तक कि यह सूर्य के प्रकाश को भी नहीं छोड़ते।

Black hole

Black hole
BLACK HOLE

ब्लैक होल बहुत ज्यादा घनत्व और द्रव्यमान वाले पिंड होते हैं लेकिन आकर बहुत छोटा होता है। इनका गुरत्वाकर्षण बल अचंभित कर देने वाला होता है यहाँ तक की यह अपने असीमित गुरुत्वाकर्षण बल के कारण प्रकाश की किरणों को भी वापस बाहर नहीं आने देते और पूरी तरह से उन्हें अवशोषित कर लेते हैं।

सबसे पहले 1783 में प्रोफेसर जॉन मिशेल ने black hole के बारे में जानकारी दी थी उसके बाद 1796 में पियरे साइमन लाप्लास ने अपनी किताब ‘द सिस्टम ऑफ़ द वर्ल्ड’ में इसके बारे में काफी कुछ विस्तार से लोगों के सामने जानकारी रखी।

Black hole कैसे बनते हैं ?

black hole के बनने की प्रक्रिया को समझने के लिए आइये पहले समझते हैं की तारे का निर्माण कैसे होता है। किसी तारे का निर्माण जहाँ होता है उसे हम निहारिका बोलते हैं। इनमे हाइड्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है और हीलियम मौजूद रहती है कुछ थोड़ी मात्रा में भरी तत्व भी होते हैं।

इस प्रकार धूल और गैस के विशाल बादल बन जाते हैं , यही बादल अपने ही गुरत्व बल के कारण सिकुड़ने लग जाते हैं जिसके कारण इसके केंद्र में ताप और दाब में वृद्धि होती चली जाती है। और फिर एक समय आता है जब ताप और दाब इतना अधिक हो जाता है कि हाइड्रोजन के नाभिक आपस में टकराकर हीलियम के नाभिक का निर्माण करने लगते हैं।

ALSO READ:

इस प्रक्रिया को हम नाभिकीय संलयन बोलते हैं जिससे बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है और जब यह एक बार शुरू हो जाती है तो फिर यह तारे में उसकी मौत तक अनवरत चलती रहती है। किसी भी तारे कि मौत तभी होती है जब वह अपनी साडी हाइड्रोजन को हीलियम में बदल देता है।नाभिकीय संलयन से निकलीं असीमित ऊष्मा से ही तारों का गुरुत्वाकर्षण संतुलन में रहता है और जब यही प्रक्रिया बंद हो जाती है तो तारा भी ठंडा होने लगता है।

भारत के ही वैज्ञानिक चंद्रशेखर ने यह बताया कि अपने ईंधन को समाप्त कर चुके सौर द्रव्यमान से 1.4 गुना द्रव्यमान वाले तारे जब अपने ही केंद्र के गुरत्व बल को नहीं सम्हाले रख पते तो उनके केंद्र में एक भयंकर विस्फोट होता है और उनका अधिकतर भाग दूर छिटक जाता है और विस्फोट के बाद जो थोड़ा सा भाग बचता है उसका घनत्व बहुत ही ज्यादा होता है। जिसे हम न्युट्रान तारा बोलते हैं।

बहुत सारे ऐसे तारे होते हैं जिनका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान से तीन से चार गुना से भी अधिक है इन तारों में गरुत्वीय खिंचाव इतना अधिक हो जाता है कि तारा भी सिकुड़ने लग जाता है और स्पेस टाइम को विकृत कर देता है और संकुचित होते होते एक समय ऐसा आता है कि तारा स्पेस टाइम को इतना झुका देता है कि वह अदृश्य हो जाता है यही black hole होते हैं।

Black hole कितने प्रकार के होते हैं ?

अभी तक black hole के बारे में हमारे पास जो जानकारी है वह बहुत ज्यादा भी नहीं है अब तक ज्ञात जानकारी के अनुसार हम ब्लैक होल को तीन भागों में बाँट सकते हैं और बाकी नयी -नयी खोज सामने आ ही रही हैं।

1- Stellar mass black hole –

जिन तारों का द्रव्यमान हमारे सूर्य से ज्यादा होता है ऐसे तारों कि जब मौत होती है तो उससे जिस प्रकार के ब्लैक होल का निर्माण होता है उसे हम stellar mass black hole कहते हैं।

2- Supermassive black hole –

ऐसे ब्लैक होल का निर्माण आकाश गंगा के केंद्र में होता है और यह बहुत विशाल होते हैं तथा इनका घनत्व भी प्रचंड होता है। ऐसे ब्लैक होल का द्रव्यमान भी बहुत ज्यादा होता है , हमारी आकाश गंगा के केंद्र में भी एक सुपरमेसिव ब्लैक होल है जिसका द्रव्यमान हमारे सूर्य से एक करोड़ गुना से भी ज्यादा है।

3- Primordial black hole –

सूर्य से कम द्रव्यमान वाले जिनका निर्माण गुरत्वीय संकुचन के कारण नहीं बल्कि केंद्र में ताप और दाब के संपीडन के कारण होता है primordial black hole कहलाते हैं। इनके अध्ययन से हमें बहुत सी जानकारियां मिल सकती हैं।

अगर black hole में गिर जाएँ तो क्या होगा ?

black hole के अंदर गिरने पर हमारे साथ क्या होगा यह सवाल आज भी सवाल बना हुआ है। ब्लैक होल के अंदर गिरने पर हम हो सकता है जिन्दा भी रहें और हो सकता हैं कि तुरंत मर जाएँ। यह भी हो सकता है कि हम किसी और ब्रह्माण्ड में पहुँच जाएँ फ़िलहाल किसी ब्लैक होल में गिरने के बाद हमारा क्या होगा यह सवाल अभी सवाल ही है।

हमारे सबसे पास black hole कहाँ है ?

वैज्ञानिकों ने अभी तक जो ब्लैक होल पृथ्वी के सबसे नज़दीक खोजा है वह हमारी पृथ्वी से लगभग एक हज़ार प्रकाश वर्ष दूरी पर स्तिथ है। इस ब्लैक होल का द्रव्यमान हमारे सूर्य से पांच गुना तथा आकर चार गुना बड़ा है। यह दो तारों के बीच छुपा हुआ है।

Black hole को कैसे खोजा जाता है ?

काफी महत्वपूर्ण सवाल है कि जब ब्लैक होल अदृश्य होते हैं तो फिर वैज्ञानिक इन्हें कैसे देख लेते हैं क्योंकि किसी भी चीज को देखने के लिए ज़रूरी है कि वह चीज प्रकाश का कुछ न कुछ अंश रिफ्लेक्ट करे लेकिन ब्लैक होल तो सम्पूर्ण प्रकाश को अपने अंदर ही सोख लेते हैं तो फिर वैज्ञानिक उन्हें कैसे खोज लेते हैं।

ब्लैक होल भले ही प्रकाश किरणों का उत्सर्जन न करे लेकिन उसका गुरत्व बल इतना ज्यादा होता है कि यह अपने निकट के तारों या पिंडों पर गुरत्वाकर्षण का प्रभाव डालता है। यहाँ हम एक बात आपको और बता दें कि प्रत्येक अदृश्य तारा ब्लैक होल नहीं हो सकता। ऐसा भी हो सकता है कि वह तारा हमसे बहुत ज्यादा दूरी पर हो और उसका प्रकाश हम तक बहुत धीमी गति से पहुँच रहा हो।

किसी अदृश्य तारे के द्रव्यमान की गणना करके हम पता लगा सकते हैं कि वह अदृश्य तारा एक black hole हो सकता है। अगर उस तारे का द्रव्यमान उसके सौर द्रव्यमान से तेन चार गुना अधिक है तो वह तारा एक ब्लैक होल हो सकता है।

पृथ्वी कब black hole बन सकती है ?

आप बिलकुल भी डरियेगा नहीं पृथ्वी कभी भी ब्लैक होल नहीं बनने जा रही यह सिर्फ एक काल्पनिक सवाल है। अगर हमारी पृथ्वी के पदार्थों का घनत्व लाखों-करोड़ों गुना हो जाए और हम पृथ्वी को संकुचित करके मात्र 1.5 सेमी कर दें तो गुरटवबल के कारण पृथ्वी भी प्रकाश किरणें उत्सर्जित नहीं कर पाएगी और एक black hole बन जायेगी।

FOLLOW US: FACEBOOK PAGE.

Hello, everyone Myself Anmol Mishra I'm from Rampur Uttar Pradesh. Welcome to our blog Tourkro Here we will provide you only interesting and original content, which you will like very much.

Leave a Reply

Share via
Copy link
Powered by Social Snap
%d bloggers like this: