यह हैं ब्रह्माण्ड के 5 विचित्र ग्रह, सब कुछ यहाँ है अनोखा

वैसे तो हमारी पृथ्वी भी अनेकों विचत्रताओं से भरी पड़ी है, लेकिन जब हम अपने ब्रह्माण्ड की और देखते हैं तो ऐसे ऐसे आश्चर्य देखने और सुनने को मिलते हैं कि सुनकर विशवास ही नहीं होता। आइये आज अपने ब्रह्माण्ड के कुछ ऐसे विचित्र ग्रह की यात्रा करते हैं जहाँ सब कुछ ही विचित्र है। जी हाँ ऐसा कुछ कि आप दांतों तले उंगलियां दबाने के लिए मज़बूर हो जाएँ। तो आइये सबसे पहले चलते हैं इस ग्रह पर।

ब्रह्माण्ड

Corot-7b

2009 में खोजा गया यह ग्रह, साक्षात् नरक के दर्शन आप यहां कर सकते हैं। हाँ जी आपने ठीक पढ़ा है यहाँ का वातावरण आपको नरक के दर्शन कराता है। वैसे तो वैज्ञानिकों ने इसे जो नाम दिया है वह है CoRoT-7b लेकिन बोलचाल की भाषा में इसे आप लावा ग्रह बोल सकते हैं। यह ग्रह अपने सूर्य से बहुत ज्यादा पास है और टाइटली लॉक्ड भी है।

यहाँ जहाँ भी आपकी नज़र जायेगी हर तरफ आपको गर्म लावा ही मिलने वाला है। जैसे आप पृथ्वी पर पानी के समुद्र देखते हैं वैसे ही आपको यहाँ लावा के समुद्र देखने को मिलेंगे। इसके अपने तारे के इतने ज्यादा पास होने कि वजह से यहाँ का तापमान 2200 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है जो वहां की चट्टानों को पिघलकर लावा बना देता है।

अगर हम पृथ्वी से इसकी दूरी की बात करें तो यह हमसे 480 प्रकाशवर्ष दूर है जिसका मतलब है कि अगर हम प्रकाश की गति से यहाँ के लिए यात्रा शुरू करें तो 480 साल में हम वहां पहुँच जाएंगे। इस ग्रह के अपने तारे से टाइटली लॉक्ड होने के कारण हमेशा इसका एक हिस्सा अपने तारे के सामने रहता है और दूसरा हिस्सा इसके विपरीत रहता है जिसके कारण यहाँ एक हिस्से में हमेशा दिन तो दुसरे हिस्से में हमेशा रात रहती है।

जो भाग तारे के सामने रहता है वहां पर तापमान इतना ज्यादा रहता है की वहाँ के खनिज हमेशा लावा बनकर बहते रहते हैं और जो हिस्सा विपरीत साइड में रहता है वहाँ तापमान कम रहता है जिससे सामने रहने वाले हिस्से से खनिजों के बादल बनते हैं और दुसरे ठन्डे रहने वाले हिस्से में ठन्डे होकर बरसते हैं लेकिन यह वारिश भी बहुत विचित्र होती है। यह पानी की नहीं बल्कि खनिजों की और पत्थरों की होती है।

Gliese 1214 b

आइये हो सकता है आपको यह ग्रह पसंद न आया हो तो कोई बात नहीं, चलिए दुसरे ग्रह पर चलते हैं। इसका नाम है Gliese 1214 यानी GJ 1214 बी, यहाँ आपको पानी ही पानी दिखाई देगा। जहाँ तक आपकी नज़र जायेगी वहां पानी ही नज़र आएगा क्योंकि यह ग्रह पानी का ही बना हुआ है। जैसे हमारी पृथ्वी पर 71 प्रतिशत स्थान पर पानी ही पानी है ऐसे ही यहाँ आपको धरती मुश्किल से ही देखने को मिलेगी बस हर जगह पानी ही पानी मिलेगा।


यहाँ पानी के बड़े बड़े समुंदर हैं और वह बहुत ही गहरे गहरे हैं। पृथ्वी पर तो समुंदर की गहराई लगभग 11 किलोमीटर ही है लेकिन यहाँ के समुद्र सैंकड़ों किलोमीटर गहरे हैं जिसके कारण नीचे पानी का दवाब इतना ज्यादा हो जाता है की दवाब के कारण पानी द्रव अवस्था में नहीं रह पाता और वह जम जाता है।

हम जानते हैं की पानी जमने के बाद बर्फ बन जाता है तो यहाँ दवाब के कारण जो बर्फ बनती है वह ठंडी न होकर बेहद गर्म होती है। इस बर्फ को हम आइस 7 के नाम से जानते हैं। पृथ्वी पर यह बर्फ प्राकृतिक रूप से कहीं नहीं पाया जाता है। यह ग्रह Glease 1214 taare का चक्कर लगाता है जो पृथ्वी से 48 प्रकाशवर्ष दूर है।


इस गृह का द्रव्यमान हमारी पृथ्वी के मुकाबले । 2 .7 गुना ज्यादा है। अगर हम वजन की बात करें तो यह हमारी पृथ्वी से 7 गुना ज्यादा भारी है। यह अपने ताते का एक पूरा चक्कर मात्र 38 घंटों में लगा लेता है। अपने तारे के बहुत ज्यादा नज़दीक होने के कारण यहाँ का तापमान और प्रेशर बहुत ज्यादा है इसलिए यहाँ पानी द्रव अवस्था में न रहकर प्लाज्मा के रूप में पाया जाता है।

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आपसे अगर यह सवाल पूछा जाए कि आपने आज तक कितने बड़े हीरे कि कल्पना की है तो हम आपको अब वहां ले चलते हैं जो आप कल्पना भी नहीं कर सकते। हम बात कर रहे हैं एक ऐसे ग्रह की जिसे आप पृथ्वी से दुगना बड़ा हीरा कह सकते हैं। जी हाँ आपने बिलकुल ठीक पढ़ा, हमारी पृथ्वी से मात्र 40 प्रकाश वर्ष दूर एक ऐसे ग्रह की खोज हुई है जो पूरे का पूरा हीरे का बना हुआ है।


यह ग्रह अपने तारे के बहुत ज्यादा पास है जिसके कारण यहाँ का तापमान 2000 डिग्री सेल्सियस है और यह मात्र 18 घंटे में ही अपने तारे का चक्कर लगा लेता है। इसकी खोज 2004 में हुई थी। इस गृह पर कार्बन की मात्रा बहुत ज्यादा है और अपने तारे के इतनी ज्यादा करीब होने के कारण यहाँ बहुत ज्यादा तापमान और प्रेशर रहता है इसलिए इस ग्रह की सतह हीरे में बदल चुकी है।


अब तापमान और प्रेशर बहुत ज्यादा होने के कारण अब हम यहाँ उतरकर हीरे तो ला नहीं सकते और फिर धरती से इतना दूर होने के कारण हम यहाँ पहुँच भी नहीं सकते तो यह गृह हमारे तो किसी काम का नहीं चलिए किसी दुसरे ग्रह की यात्रा करते हैं।

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यह ग्रह हमसे 63 प्रकाशवर्ष दूर है अर्थात प्रकाश की गति से भी अगर हम यात्रा करें जो नामुमकिन है तब भी यहाँ पहुँचने में हमें 63 साल लग जाएंगे। फिर भी चलिए देखते हैं इस ग्रह पर चलकर। यहाँ भी नर्क जैसा ही वातावरण है, यहाँ सिलिका की बहुतायत है इसलिए यहाँ जो बादल बनते हैं वह सिलिका के ही बनते हैं।


सिलिका जो कांच की तरह होता है जब यह बादल ठन्डे होकर बरसते हैं तो यहाँ कांच की बारिश होती है और वह भी बहुत तेज़ गति के साथ। यहाँ बहुत ही तेज़ हवाएं चलती हैं, जिनकी गति 8700 किमी तक पहुँच जाती है यह गति हमारी पृथ्वी से कई गुना ज्यादा है। यह गति हवाओं को यहाँ के वातावरण के कारण ही मिलती है।


इस ग्रह को 5 ऑक्टूबर 2005 में खोजा गया था। शायद आपको यह ग्रह भी पसंद नहीं आया होगा तो आइये अब किसी और ग्रह पर चलकर देखते हैं हो सकता है वह आपके सपनों का ग्रह ही निकल आये।

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यह ग्रह सबसे तेज़ ग्रह है यहाँ एक साल केवल 7 घंटे में ही पूरा हो जाता है। इसे आप लोहे से बना ग्रह भी कह सकते हैं क्योंकि यहाँ आयरन की मात्रा 70 प्रतिशत तक है। यह हमारी पृथ्वी से पांच गुना बड़ा है। इस ग्रह का पूरा वतावरण स्टेलर रेडिएशन की वजह से बिल्कुल बर्बाद हो चुका है।


अगर यह ग्रह अपने तारे के नज़दीक न होता तो इससे अभी तक वरवरण वाष्प बनकर उड़ चुका होता। अभी बहुत कुछ जानकारी इस ग्रह के बारे में जुटाने की बाकी हैं। उसके बाद ही हम जान पाएंगे की असल में यहाँ का एक दिन कितने घंटों का होता है। वैसे हम आपको बता दें ज्यादा खुश होने की बात नहीं है यहाँ का वातावरण भी हम इंसानों के रहने योग्य बिल्कुल भी नहीं है।


अब हमने कई ग्रहों की यात्रा की कहीं पत्थर तो कहीं आग या कहीं कांच की बारिश और हवाएं भी इतनी तेज़ की पलभर में हमारे चीथड़े उड़ा दे। इसका मतलब अभी तक कोई भी ग्रह ऐसा नहीं मिल पाया की जहाँ हम आराम के साथ जाकर रह लें लेकिन हमें आशा नहीं छोड़नी चाहिए जल्दी ही हमें कोई न कोई ग्रह हमें जल्दी ही ऐसा मिलेगा जो हमारी पृथ्वी की तरह ही होगा।

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